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साहित्य का इतिहास दर्शन

By डॉ. प्रभात कुमार मिश्र   |   हिन्दी विभाग, असम विश्वविद्यालय, सिलचर, असम
Learners enrolled: 342

साहित्य का इतिहास दर्शन पाठ्यक्रम को ज्ञान के विभिन्न अनुशासनों में स्वीकृति मिली है और इसे साहित्यिक अध्ययन के क्षेत्रों में आवश्यक प्रस्थान के बतौर पढ़ाया जाता रहा है। इस पाठ्यक्रम से छात्रों को - साहित्य के इतिहास में निहित विचारधाराओं और सिद्धांतों का परिचय मिलेगा, समाज के इतिहास और भाषा तथा साहित्य के इतिहास के अन्तःसम्बन्धों को समझने में मदद मिलेगी और साहित्येतिहास को केन्द्र में रखकर अनुवाद, पांडुलिपियों, लोकसाहित्य और लोकभाषाओं पर विचार करने का अवसर मिलेगा। इस पाठ्यक्रम का आरम्भ साहित्येतिहास की अवधारणा को समझने से होगा और फिर धीरे-धीरे साप्ताहिक मॉड्यूलों के माध्यम से साहित्येतिहास की विभिन्न दृष्टियों, पद्धतियों, समस्याओं और साहित्येतिहास लेखन की चर्चा की जाएगी। यह पाठ्यक्रम छात्रों को साहित्य और ऐतिहासिक कालखंडों, संदर्भों और सिद्धांतों के बीच के सम्बन्ध को स्पष्ट करने में उपयोगी होगा। इस पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद छात्र- साहित्येतिहास दर्शन के बारे में आलोचनात्मक समझ विकसित करने में सक्षम हो सकेंगें, साहित्येतिहास दर्शन और लेखन के बारे में अपनी स्वतन्त्र राय विकसित कर सकेंगे, साहित्य की विभिन्न परम्पराओं की निरंतरता और विच्छेद के कारणों को समझ सकेंगे और साहित्य की प्रवृत्तियों, विकास और परम्परा के विकास को ऐतिहासिक विकास के परिप्रेक्ष्य में रखकर देख सकने की क्षमता अर्जित कर सकेंगे। चूंकि यह पाठ्यक्रम हिन्दी भाषा माध्यम से ही उपलब्ध है इसीलिए छात्रों से हिन्दी भाषा का परिचय अपेक्षित है।

Summary
Course Status : Ongoing
Course Type : Core
Duration : 15 weeks
Start Date : 13 Jan 2020
End Date : 30 Apr 2020
Exam Date : 10 May 2020
Enrollment Ends : 08 Mar 2020
Category :
  • Language
Level : Postgraduate



Course layout

सप्ताह - 1 : पाठ्यक्रम का परिचय, साहित्य का इतिहास क्या है? साहित्य के इतिहास की जरुरत, साहित्येतिहास और साहित्यिकता
सप्ताह - 2 : साहित्य के इतिहास की विधेयवादी दृष्टि, साहित्य के इतिहास की मार्क्सवादी दृष्टि, साहित्य के इतिहास की अन्य प्रमुख दृष्टियां
सप्ताह - 3 : हिन्दी साहित्य का इतिहासलेखन - 1,  हिन्दी साहित्य का इतिहासलेखन - 2, हिन्दी साहित्य का इतिहासलेखन - 3
सप्ताह - 4 : साहित्य के इतिहास में कालविभाजन की जरुरत, हिन्दी साहित्य के इतिहास में कालविभाजन की जरुरत
सप्ताह - 5 : साहित्य के इतिहास में कालविभाजन का आधार - 1, साहित्य के इतिहास में कालविभाजन का आधार - 2
सप्ताह - 6 : हिन्दी साहित्य के इतिहासलेखन की समस्याएं, हिन्दी साहित्य के इतिहासलेखन पर पुनर्विचार (आदिकाल एवं भक्तिकाल),
  हिन्दी साहित्य के इतिहासलेखन पर पुनर्विचार (रीतिकाल एवं आधुनिककाल)
सप्ताह - 7 : साहित्य का इतिहासलेखन और लोकभाषाएं, हिन्दी साहित्य का इतिहासलेखन और लोकभाषाएं, साहित्य का इतिहासलेखन और लोक साहित्य
सप्ताह - 8 : हिन्दी साहित्य का इतिहासलेखन और हिन्दी-उर्दू समस्या - 1, हिन्दी साहित्य का इतिहासलेखन और हिन्दी-उर्दू समस्या - 2
सप्ताह - 9 : रामचन्द्र शुक्ल की इतिहासदृष्टि - 1, रामचन्द्र शुक्ल की इतिहासदृष्टि - 2
सप्ताह - 10 : हजारी प्रसाद द्विवेदी  की इतिहासदृष्टि - 1, हजारी प्रसाद द्विवेदी  की इतिहासदृष्टि - 2
सप्ताह - 11 : नलिन विलोचन शर्मा की इतिहासदृष्टि - 1, नलिन विलोचन शर्मा की इतिहासदृष्टि - 2
सप्ताह - 12 : रामविलास शर्मा की इतिहासदृष्टि -  1,  रामविलास शर्मा की इतिहासदृष्टि - 2
सप्ताह - 13 : नामवर सिंह की इतिहासदृष्टि - 1, नामवर सिंह की इतिहासदृष्टि -  2
सप्ताह - 14 : नगेन्द्र की इतिहासदृष्टि, रामस्वरुप चतुर्वेदी की इतिहासदृष्टि 
सप्ताह - 15 : मैनेजर पाण्डेय की इतिहासदृष्टि, सुमन राजे की इतिहासदृष्टि , निष्कर्ष

Books and references

1. हिन्दी साहित्य का इतिहास, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, नागरीप्रचारिणी सभा, वाराणसी
2. साहित्य का इतिहास दर्शन, नलिन विलोचन शर्मा, बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, पटना
3. इतिहास दर्शन, रामविलास शर्मा, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली
4. इतिहास और आलोचना, नामवर सिंह, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली
5. साहित्य और इतिहास दृष्टि, मैनेजर पाण्डेय, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली
6. हिन्दी साहित्य का इतिहास : पुनर्लेखन की समस्याएँ, सम्पादन एवं संकलन श्याम कश्यप, हिन्दी माध्यम कार्यान्वय निदेशालय, दिल्ली
7. हिन्दी साहित्य और सम्वेदना का विकास, रामस्वरूप चतुर्वेदी, लोकभारती प्रकाशन,इलाहबाद
8. साहित्य का इतिहास लेखन : समस्या-समाधान, व्यास भोलाशंकर. राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर 

Instructor bio

डॉ. प्रभात कुमार मिश्र

हिन्दी विभाग, असम विश्वविद्यालय, सिलचर, असम
डॉ. प्रभात कुमार मिश्र असम (केंद्रीय) विश्वविद्यालय, सिलचर में वर्ष 2008 से हिन्दी के अध्यापक हैं। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से एम.ए. (हिन्दी) की उपाधि पाने के बाद आपने यूजीसी अध्येता के बतौर जे.एन.यू., नई दिल्ली में कवि विद्यापति से सम्बन्धित बहुप्रशंसित शोध किया है। इसके अतिरिक्त साहित्येतिहास, हिन्दी नवजागरण और हिन्दी कविता में आपकी विशेष गति है। आपने निरंतर नए विषयों तथा नवोन्मेषी पद्धतियों को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रमों के नवीकरण पर ध्यान दिया है। विश्वविद्यालय ने ‘इन्सपायर् फैकल्टी’ के रूप में आपको चुना था। आपके शोधपत्र, आलेख एवं समीक्षाएं आदि प्रकाशित होते रहे हैं और दो पुस्तकें ‘प्राच्यवाद और हिन्दी नवजागरण’(2015) तथा ‘हिन्दी में कालिदास’(2016) प्रकाशित हैं।

Course certificate

इस पाठ्यक्रम में 30 अंक आंतरिक मूल्यांकन के लिए तथा 70 अंक अंतिम परीक्षा हेतु निर्धारित हैं।


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