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आधुनिक हिंदी कविता (छायावाद तक)

By Dr. Rupali Sarye (Jhanjhot)   |   School of Comparative Language and Culture, Devi Ahilya Vishwavidyalaya, Indore
Learners enrolled: 132
यह पाठ्यक्रम आधुनिक हिंदी कविता की प्रमुख प्रवृत्तियों—छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, नई कविता एवं समकालीन कविता—का विश्लेषणात्मक अध्ययन कराता है। इसके माध्यम से विद्यार्थी यह समझ सकेंगे कि उपनिवेशवाद, राष्ट्रवाद, नारी चेतना, दलित विमर्श, औद्योगीकरण, आधुनिकता और उत्तर-आधुनिकता जैसी विचारधाराओं ने कविता को किस प्रकार प्रभावित किया।

यह पाठ्यक्रम कविता को केवल सौंदर्यबोध की रचना न मानकर उसे सामाजिक यथार्थ, संवेदना और विचार का माध्यम मानने की दृष्टि विकसित करता है। इससे विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच, साहित्यिक विवेक और सामाजिक-सांस्कृतिक समझ का विकास होता है।
Summary
Course Status : Upcoming
Course Type : Core
Language for course content : Hindi
Duration : 12 weeks
Category :
  • Language
Credit Points : 5
Level : Undergraduate
Start Date : 15 Jan 2026
End Date : 30 Apr 2026
Enrollment Ends : 28 Feb 2026
Exam Date :
Translation Languages : Hindi
NCrF Level   : 4.5

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Course layout

सप्ताह मॉड्यूल संख्या मॉड्यूल का शीर्षक
1 1 आधुनिक काल समय सीमा और नामकरण 
  2 आधुनिक काल के काव्य की परिस्थितियाँ 
  3 नवजागरण: अवधारणा एवं पृष्ठभूमि 
  4 भारतेंदु युगीन काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियां-प्राचीनता एवं नवीनता का समन्वय, प्रकृति का चित्रण,भाषा
  5 भारतेन्दु युग- भारतेन्दु मण्डल के कवि
2 6 दशरथ विलाप
  7 द्विवेदी युग - पृष्ठभूमि, समय सीमा एवं विशेषताएँ
  8 द्विवेदी  युग -महावीर प्रसाद द्विवेदी की संपादकीय भूमिका
  9 द्विवेदी युग - साहित्यिक घटनाएँ, इतिवृत्तात्मकता, अनुवाद कार्य प्रकृति चित्रण  
3 10 मैथिलीशरण गुप्तः व्यक्तित्व एवं कृतित्व
  11 मैथिलीशरण गुप्त: भारतीय संस्कृति का गौरव गान
  12 भारत-भारती
  13 पंचवटी भाग -1
  14 पंचवटी भाग -2
4 15 साकेत-नवमसर्ग भाग -1
  16 साकेत-नवमसर्ग भाग -2
  17 अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध': व्यक्तित्व एवं कृतित्व
  18 प्रियप्रवास- पौराणिक कथाओं का आधुनिक उपयोग
  19 श्याम नारायण पांडे व्यक्तित्व एवं कृतित्व एवं  काव्य सौष्ठव
5 20 जौहर  एवं हल्दीघाटी की कथावस्तु
  21 जौहर (चयनित अंश )भाग -1
  22 जौहर (चयनित अंश )भाग -2
  23 रामनरेश त्रिपाठी 
6 24 छायावाद उद्‌भव, समय सीमा और नामकरण
  25 छायावाद एवं सांस्कृतिक नवजागरण
  26 छायावाद की विविध प्रवृत्तियाँ
  27 जयशंकर प्रसाद: एक परिचय
  28 प्रसाद का काव्य सौष्ठव 
7 29 झरना
  30 आंसू 
  31 कामायनी -शिल्प विधान
  32 कामायनी -श्रद्धासर्ग भाग-1 
  33 कामायनी -श्रद्धासर्ग भाग-2
8 34 कामायनी-चिंता सर्ग भाग-1
  35 कामायनी-चिंता सर्ग भाग-2
  36 कामायनी-ईडा़ सर्ग भाग-1
  37 कामायनी-ईडा़ सर्ग भाग-2 
  38 कामायनी-ईडा़ सर्ग भाग -3
9 39 सुमित्रानंदन पंत : व्यक्तित्व एवं कृतित्त्व
  40 प्रथम रश्मि एवं  नौका विहार
  41 परिवर्तन
  42 सूर्यकांत त्रिपाठी निराला : एक परिचय
  43 निराला का काव्य सौष्ठव 
10 44 निराला की कविताओं का एक अनुशीलन
  45 राम की शक्तिपूजा भाग (1) 
  46 राम की शक्तिपूजा भाग (2)
  47 राम की शक्तिपूजा भाग (3)
  48 निराला की कविता तुलसीदास भाग- 1
11 49 निराला की कविता तुलसीदास भाग -2
  50 निराला की कविता तुलसीदास भाग- 3
  51 महादेवी वर्मा : व्यक्तित्व एवं कृतित्व, स्त्री संवेदना की अभिव्यक्ति
  52  मैं नीर भरी दुख की बदली,पंथ होने दो अपरिचित  
  53 बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ!
12 54 छायावाद की  समकालीन काव्यधारा भाग-1
  55 छायावाद की  समकालीन काव्यधारा भाग-2
  56 छायावाद के प्रमुख कवि भाग-1
  57 छायावाद के प्रमुख कवि भाग-2
  58 छायावाद: युगांत

Instructor bio

Dr. Rupali Sarye (Jhanjhot)

School of Comparative Language and Culture, Devi Ahilya Vishwavidyalaya, Indore
डॉ. रूपाली सारये हिंदी साहित्य और तुलनात्मक भाषा अध्ययन की एक गंभीर अध्येता, समर्पित शिक्षिका एवं सक्रिय शोधकर्त्री हैं। वर्तमान में आप देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर (मध्य प्रदेश) के तुलनात्मक भाषा एवं संस्कृति विभाग में सहायक प्राध्यापक (Assistant Professor) के पद पर कार्यरत हैं।

आपने अपनी उच्च शिक्षा विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन से पूरी की है तथा पी.एच.डी. की उपाधि “मालवी लोकसाहित्य में नारी जीवन के विविध आयाम” विषय पर अर्जित की है। इसके अतिरिक्त आपने एम.ए., एम.फिल., बी.एड., नेट (UGC), एम.पी. सेट जैसी महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर परिश्रम और शोध की गहरी रुचि ने आपको साहित्य और लोक संस्कृति की एक सशक्त शोधकर्त्री के रूप में स्थापित किया है।
शोध एवं प्रकाशन

आपका शोध मुख्यतः हिंदी साहित्य, लोकसाहित्य, स्त्री-विमर्श, पर्यावरण चेतना, नाट्य परंपरा, अनुवाद अध्ययन एवं सांस्कृतिक इतिहास से संबंधित रहा है। आपने अब तक 60 से अधिक शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित किए हैं, जिनमें कई UGC-CARE Listed, Peer-Reviewed एवं Refereed Journals शामिल हैं। इसके अतिरिक्त आपने कई पुस्तकें एवं संपादित संकलन प्रकाशित किए हैं, जिनमें—

सांस्कृतिक झरोखे से मालवा-निमाड़ (2022)

नवीन शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप हिंदी एवं अंग्रेज़ी आधार पाठ्यक्रम (2022)

लोक साहित्य की अवधारणा एवं मालवी लोक साहित्य का सांस्कृतिक इतिहास (2023)

फणीश्वर नाथ रेणु के कथा साहित्य में मनोविज्ञान (2023)

मालवी लोककथाओं एवं लोकगीतों में नारी (2024)
जैसे महत्वपूर्ण प्रकाशन उल्लेखनीय हैं।

शैक्षणिक योगदान

आपका शैक्षणिक सफर केवल शोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आपने निरंतर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और वेबिनारों में भाग लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए हैं। अब तक आपने 30 से अधिक राष्ट्रीय संगोष्ठियों और 20 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए हैं।

आपके शोध-पत्रों में मालवी लोकगीतों में नारी संवेदना, रामकथा की परंपरा, लोक संस्कृति में पर्यावरण चेतना, समकालीन कविता और सामाजिक सरोकार, स्त्री विमर्श जैसे विविध विषयों पर गहन अध्ययन देखने को मिलता है।

संपादकीय एवं अन्य अकादमिक गतिविधियाँ

अक्षरवार्ता अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिका, बुंदेलखंड विमर्श, कृष्ण बसंती शोध पत्रिका, संचेतना वानी प्रकाशन की सह-संपादक के रूप में कार्य।

महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन की वार्तापत्रिका में सहसंपादक।

विभिन्न सांस्कृतिक-साहित्यिक आयोजनों में अतिथि वक्ता एवं विशिष्ट शोध अध्येता के रूप में सम्मानित।

प्रतिकल्पा सांस्कृतिक संस्था, उज्जैन द्वारा कई बार श्रेष्ठ शोध अध्येता पुरस्कार से सम्मानित।

उज्जैन साहित्य उत्सव और अन्य अकादमिक मंचों पर Literature Excellence Award (2023) प्राप्त।

दृष्टिकोण और उद्देश्य


“भाषा और साहित्य केवल अभिव्यक्ति के साधन नहीं, बल्कि संस्कृति और समाज के जीवित दस्तावेज़ हैं। लोक साहित्य में निहित जीवन मूल्यों को संरक्षित करते हुए उन्हें अकादमिक जगत और नई पीढ़ी तक पहुँचाना ही एक अध्यापक और शोधकर्त्ता का वास्तविक उद्देश्य है।

Course certificate

Course Certificate Criteria 

1.       End-Term Examination:

o    Weightage: 70% of the final result

o    Minimum Passing Criteria: 40%

2.       Internal Assessment:

o    Weightage: 30% of the final result

o    Minimum Passing Criteria: 40%

Calculation of IA Marks:

o    Out of all graded weekly assessments/assignments, the top 50% of assignments shall be considered for the calculation of the final Internal Assessment marks.

All students who obtain 40% marks in the internal assessment and 40% marks in the end-term proctored exam separately will be eligible for the SWAYAM Credit Certificate.

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